कहानियां
चौका प्रणाली ने बदल दी लोगों की तकदीर…
चौका प्रणाली ने लोगों के चेहरों से गुम हुई हंसी ओर मुस्कुराहट को वापस लौटाया है। जब यह गांव ताश के पत्तों की तरह बिखरने लगा था, तब चौका…
गोपालपुरा गांव के चारागाह की दास्तान
कभी-कभी कुछ कहानियां छोटी होती हैं, लेकिन वो कम शब्दों में भी अपनी पूरी दास्तां बया कर देती है। ऐसी ही एक छोटी कहानी राजस्थान के जयपुर जिले के पास…
हलमा से निकला समुदाय की समस्याओं का हल!
राजस्थान की अरावली पठार के बाँसवाड़ा जिले की तहसील घाटोल में बसा है पहाड़ी क्षेत्र वाला गांव मियासा। यहां रहने वाली जनजाति यहां की जैव-विविधता पर पूरी तरह निर्भर…
बंजर धरती ने यूं ओढ़ी हरियाली की चादर
राजस्थान के करौली जिले में चंबल नदी के किनारे बीहड़ में बसे गांव ओंड के छोटे और सीमांत किसान बारिश पर निर्भर थे। मिट्टी कटाव के कारण केवल 20% जमीन…
सूखे गांव जो पानीदार हो गए
महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र हमेशा से जलसंकट से घिरा रहा है। पानी फाउंडेशन द्वारा की गई पहल से इस अंचल के कई गांवों में पानी सहेजने को लेकर जागरूकता में…
खेती में देसी बीजों की वापसी
भारत के प्रत्येक कृषि अंचल में अपनी भौगोलिक एवं पर्यावरणीय परिस्थितियों की दृष्टिगत स्थानीय कृषि पद्धतियां और बीज विकसित किए हैं। झाबुआ स्थित संपर्क संस्था ने इन्हीं देसी बीजों के…
